मेमोरी क्या है रेम व रोम क्या है

मैमोरी (Memory) एक माध्यम है जो कि बाइनरी सूचना अर्थात् निर्देशों, डेटा को कम्प्यूटर में स्टोर करता है, कम्प्यूटर मैमोरी कहलाता है। मैमोरी किसी भी डिजिटल कम्प्यूटर का एक आवश्यक अवयव होता है क्योंकि यह प्रोग्राम्स में डेटा को स्टोर करने के लिए उपयोग होती है।

कम्प्यूटर में लगा इलेक्ट्रॉनिक सर्किट केवल मशीनी भाषा ही समझ सकता है। इस भाषा में केवल दो ही अंकों अर्थात् 1 व 0 का प्रयोग किया जाता है। इसे बाइनरी सिस्टम कहते हैं। अतः कम्प्यूटर में लगी स्मृतियों की क्षमता बाइटों में मापी जाती है। 8 बिटों के समूह को बाइट कहा जाता है और दो बाइटों का एक बाइनरी शब्द बनता है। किसी लंबे संदेश को याद रखने के लिए बहुत से बाइटों की आवश्यकता होती है। बड़े आकार की स्मृतियों की क्षमता किलोबाइटों (kilobytes, KB) में और उससे भी बड़ी स्मृतियों की क्षमता को मेगाबाइटों (megabytes, MB) में मापा जाता है।

मैमोरी का वर्गीकरण (Classification of Memory)-

मैमोरी को उनकी संग्रहण या भंडारण क्षमता (storage capacity) के आधार पर निम्नलिखित दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है –

(i) प्राइमरी मैमोरी (Primary Memory)-

प्राइमरी मैमोरी को मेन मैमोरी के नाम से भी जाना जाता है। यह मैमोरी प्रोसेसर द्वारा सीधे जुड़ी होती है। मैमोरी कम्प्यूटर का कार्यकारी संग्रह (working storage) है। यह कम्प्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण भाग है जहाँ डेटा, सूचना और प्रोग्राम प्रक्रिया के दौरान स्थित रहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल प्राप्त किये जाते हैं।

कम्प्यूटर की मेन मैमोरी निम्नलिखित दो प्रकार की होती है –

(अ) रैम (RAM) –

रैम (रैण्डम एक्सेस मैमोरी) कम्प्यूटर की अस्थायी मैमोरी होती है या रेम कहलाती है। जब कम्प्यूटर में किसी प्रोग्राम को क्रियान्वित (execute) करते हैं तो सर्वप्रथम वह रैम में लोड होता है तथा उसके पश्चात् ही क्रियान्वित होता है। जब प्रोग्राम के एक भाग का कार्य पूर्ण हो जाता है तो उसके स्थान पर प्रोग्राम का दूसरा भाग लिखा जाता है, इसके साथ ही यह मैमोरी एक निश्चित क्रम(sequence) में कार्य न करके बिना क्रम (randomly) के तरीके से कार्य करती है। यह मैमोरी अपनी आवश्यकता के अनुसार प्रोग्राम या डेटा को किसी भी स्थान से पढ़कर (read) प्रयोग कर सकती है। इसके अतिरिक्त जब कम्प्यूटर को बंद (off) करते हैं तो इस मैमोरी में लोड हुए प्रत्येक निर्देश व डेटा समाप्त हो जाते हैं, इसलिये रैम को वोलेटाइल या अस्थायी मैमोरी कहते हैं। रैम की क्षमता या आकार (size) विभिन्न होते हैं, जैसे- 1MB, 2MB, 4MB, 8MB, 16MB, 32MB, 64MB आदि।

RAM MEMORY IMAGE

रैम निम्नलिखित दो प्रकार की होती हैं –

(क) स्टेटिक रैम (Static RAM)-

यह मैमोरी फ्लिप-फ्लॉप से बनी होती है और वोल्टेज के रूप में बिट को स्टोर करती है। इसमें प्रत्येक मैमोरी सेल को 6 ट्रांजिस्टरों की आवश्यकता होती है। इस मैमोरी की डेन्सिटी कम तथा गति अधिक होती है।

(ख) डायनेमिक रैम (Dynamic RAM) –

यह मैमोरी आवेश के रूप में बिट को स्टोर करती है। इस मैमोरी की उच्च डेन्सिटी और कम पावर खपत होती है। चूँकि इस मैमोरी में आवेश लीक होता है जिस कारण इसमें स्टोर इनफॉर्मेशन को कुछ मिलीसेकण्ड बाद ही रीड और राइट करने की आवश्यकता होती है। इसकी गति बहुत अधिक होती है।

(ब) रोम (ROM)-

रोम का मतलब रीड ओनली मैमोरी होता है। यह स्थायी मैमोरी होती है यह रोम कहलाती है जिसमें कम्प्यूटर के निर्माण के समय प्रोग्राम स्टोर कर दिये जाते हैं। इस मैमोरी में स्टोर प्रोग्राम परिवर्तित और नष्ट नहीं किये जा सकते हैं, उन्हें केवल पढ़ा ही जा सकता है. इसलिए यह मैमोरी रीड ओनली मैमोरी कहलाती है। जब कम्प्यूटर का स्विच ऑन करके इसे चालू करते हैं तो रोम में स्थायी रूप से स्टोर प्रोग्राम स्वतः ही क्रियान्वित हो जाते हैं। ये प्रोग्राम कम्प्यूटर की सभी डिवाइसेज को जाँच कर उन्हें सक्रिय अवस्था में लाते हैं। रोम में उपस्थित ये स्थायी प्रोग्राम बेसिक इनपुट आउटपुट सिस्टम (BIOS) के नाम से जाने जाते हैं।

ROM MEMORY

कम्प्यूटर का स्विच ऑफ करने के बाद भी रोम में स्टोर प्रोग्राम नष्ट नहीं होते हैं, अतः रोम नॉन-वोलेटाइल या स्थायी संग्रह माध्यम कहलाता है। रोम एक सेमीकंडक्टर चिप होती है जिसमें प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर स्टोर रहते हैं। इस प्रकार की हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की संयोजित तकनीक फर्मवेयर कहलाती है। अतः रोम एक फर्मवेयर है।

रोम निम्नलिखित प्रकार की होती हैं

(क) प्रोम (PROM)-

प्रोम का मतलब प्रोग्रामेबल रीड ओनली मैमोरी है। प्रोम ऐसा रिक्त रोम होता है जिसमें आवश्यकता होने पर विशेष डिवाइसेज द्वारा प्रोग्राम स्टोर किया जा सकता है और एक बार स्टोर होने के बाद उन्हें मिटाया नहीं जा सकता है। इस प्रकार की मैमोरी चिप का प्रयोग एक बार प्रोग्राम को स्टोर करने के लिए किया जाता है।

(ख) ईप्रोग (EPROM)-

ईप्रोम का मतलब इरेजेवल प्रोग्रामेबल रीड ओनली मैमोरी है। यह प्रोग के समान ही होती है, लेकिन इसमें स्टोर प्रोग्राम पराबैगनी प्रकाश (ultraviolet light) की उपस्थिति में मिटाए जा सकते हैं। नए प्रोग्राम स्टोर किये जा सकते हैं अर्थात इस प्रकार की गैगोरी चिप का प्रयोग बार-बार अपनी आवश्यकता के अनुसार प्रोग्राम को मिटाकर नये प्रोग्राम को स्टोर करने के लिए किया जाता है।

(ग) ईईप्रोग (EEPROM)-

ईईप्रोग का मतलब इलैक्ट्रिकल इरेजेवल प्रोग्रामेबल रीड ओनली गैमोरी है। यह नई तकनीक के ईप्रोम होते हैं जिनका उपयोग विद्युतीय विधि से मिटाए जा सकने वाले ईईप्रोम के रूप में किया जाता है।

(ii) सैकंडरी मैमोरी (Secondary Memory)-

कम्प्यूटर में डेटा, प्रोग्राम और प्रक्रिया परिणाम बार-बार उपयोग हेतु सुरक्षित रखना हो तो इसके लिए अतिरिक्त संग्रह क्षमता की आवश्यकता पड़ती है। सैकंडरी मैमोरी या सैकंडरी स्टोरेज इस उद्देश्य को पूरा करता है। वैसे तो प्राथमिक मैमोरी की तुलना में सैकंडरी संग्रह या सैकंडरी स्टोरेज की गति धीगी होती है लेकिन ये सस्ती और अधिक क्षमता (capacity) की होती हैं। सैकंडरी स्टोरेज •मीडिया एक स्थायी माध्यम है। इसका अर्थ है कि कम्प्यूटर को बंद करने के बाद भी इसमें स्टोर डेटा और प्रोग्राम मिट (erase) नहीं सकते हैं। अनेक सैकंडरी डिवाइसेज कम्प्यूटर में ऑनलाइन होते हैं जिन्हें रीड या राइट करने से पहले कम्प्यूटर में लगाना पड़ता है। अतः ये स्थानान्तरणीय मीडिया कहलाते हैं। डिस्केट्स, मैग्नेटिक टेप कांट्रेज, फ्लॉपी डिस्क, सी.डी, मैग्नेटिक टेप रील इसके उदाहरण हैं।

रैम एवं रोम में अंतर (Difference Between RAM and ROM)-

रैम एवं रोम में अंतर होते हैं –

क्र न.रैमरोम
(1)रंग में सूचनाएँ पढ़ी व लिखी जा सकती हैं।रोम में पूर्व लिखित सूचनाओं को सिर्फ में पढ़ा जा सकता है। सूचना लिखने की सुविधा इसमें नहीं होती है।
(2)कम्प्यूटर को बंद किये जाने पर रैम में सूचना समाप्त हो जाती है।कम्प्यूटर को बंद किये जाने पर रोम में सूचना बनी रहती है।
(3)इसे वोलेटाइल मैमोरी कहा जाता है।इसे नॉन-वोलेटाइल मैमोरी कहा जाता है
(4)रैम ऑपरेटिंग सिस्टम एवं वर्तमान प्रक्रिया को स्टोर करता है।इसे नॉन-वोलेटाइल मैमोरी कहा जाता है रोम ऑपरेटिंग सिस्टम को रैम पर लोड करने के लिए पर्याप्त प्रोग्रामिंग रखता है।
(5)रंग स्टैटिक तथा डायनेमिक प्रकार की होती है।रोम प्रोम, ईप्रोम तथा ईईप्रोम प्रकार की होती है।

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